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संकष्टी और विनायक चतुर्थी 2026

साल भर के सारे त्योहार, एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या, प्रदोष और संक्रांति — आपके शहर के हिसाब से, और हर तिथि के शुरू व ख़त्म होने के सटीक समय के साथ।

त्योहार और व्रत कैलेंडर — एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या और नवरात्रि के चित्रों वाला टेबल कैलेंडर

जनवरी 2026

  1. अंगारकी संकष्टी चतुर्थी

    कृष्ण चतुर्थी: 6 जन॰, 08:02 से 7 जन॰, 06:53 तक · चंद्रोदय 20:54

    कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए। व्रत चंद्रोदय पर खुलता है।

  2. विनायक चतुर्थी

    शुक्ल चतुर्थी: 22 जन॰, 02:47 से 23 जन॰, 02:28 तक

    शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए, मध्याह्न में।

फ़रवरी 2026

  1. संकष्टी चतुर्थी

    कृष्ण चतुर्थी: 5 फ़र॰, 00:10 से 6 फ़र॰, 00:22 तक · चंद्रोदय 21:34

    कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए। व्रत चंद्रोदय पर खुलता है।

  2. विनायक चतुर्थी

    शुक्ल चतुर्थी: 20 फ़र॰, 14:38 से 21 फ़र॰, 13:01 तक

    शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए, मध्याह्न में।

मार्च 2026

  1. संकष्टी चतुर्थी

    कृष्ण चतुर्थी: 6 मार्च, 17:53 से 7 मार्च, 19:17 तक · चंद्रोदय 21:13

    कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए। व्रत चंद्रोदय पर खुलता है।

  2. विनायक चतुर्थी

    शुक्ल चतुर्थी: 21 मार्च, 23:56 से 22 मार्च, 21:17 तक

    शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए, मध्याह्न में।

अप्रैल 2026

  1. संकष्टी चतुर्थी

    कृष्ण चतुर्थी: 5 अप्रैल, 12:00 से 6 अप्रैल, 14:11 तक · चंद्रोदय 21:53

    कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए। व्रत चंद्रोदय पर खुलता है।

  2. विनायक चतुर्थी

    शुक्ल चतुर्थी: 20 अप्रैल, 07:28 से 21 अप्रैल, 04:15 तक

    शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए, मध्याह्न में।

मई 2026

  1. अंगारकी संकष्टी चतुर्थी

    कृष्ण चतुर्थी: 5 मई, 05:24 से 6 मई, 07:51 तक · चंद्रोदय 22:30

    कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए। व्रत चंद्रोदय पर खुलता है।

  2. विनायक चतुर्थी

    शुक्ल चतुर्थी: 19 मई, 14:18 से 20 मई, 11:07 तक

    शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए, मध्याह्न में।

जून 2026

  1. संकष्टी चतुर्थी

    कृष्ण चतुर्थी: 3 जून, 21:21 से 4 जून, 23:30 तक · चंद्रोदय 21:59

    कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए। व्रत चंद्रोदय पर खुलता है।

  2. विनायक चतुर्थी

    शुक्ल चतुर्थी: 17 जून, 21:39 से 18 जून, 18:59 तक

    शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए, मध्याह्न में।

जुलाई 2026

  1. संकष्टी चतुर्थी

    कृष्ण चतुर्थी: 3 जुल॰, 11:20 से 4 जुल॰, 12:40 तक · चंद्रोदय 21:48

    कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए। व्रत चंद्रोदय पर खुलता है।

  2. विनायक चतुर्थी

    शुक्ल चतुर्थी: 17 जुल॰, 06:28 से 18 जुल॰, 04:43 तक

    शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए, मध्याह्न में।

अगस्त 2026

  1. संकष्टी चतुर्थी

    कृष्ण चतुर्थी: 1 अग॰, 23:07 से 2 अग॰, 23:15 तक · चंद्रोदय 21:20

    कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए। व्रत चंद्रोदय पर खुलता है।

  2. विनायक चतुर्थी

    शुक्ल चतुर्थी: 15 अग॰, 17:29 से 16 अग॰, 16:53 तक

    शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए, मध्याह्न में।

  3. संकष्टी चतुर्थी

    कृष्ण चतुर्थी: 31 अग॰, 08:51 से 1 सित॰, 07:42 तक · चंद्रोदय 20:25

    कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए। व्रत चंद्रोदय पर खुलता है।

सितंबर 2026

  1. विनायक चतुर्थी

    शुक्ल चतुर्थी: 14 सित॰, 07:07 से 15 सित॰, 07:44 तक

    शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए, मध्याह्न में।

  2. अंगारकी संकष्टी चतुर्थी

    कृष्ण चतुर्थी: 29 सित॰, 17:10 से 30 सित॰, 14:55 तक · चंद्रोदय 19:39

    कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए। व्रत चंद्रोदय पर खुलता है।

अक्तूबर 2026

  1. विनायक चतुर्थी

    शुक्ल चतुर्थी: 13 अक्तू॰, 23:28 से 15 अक्तू॰, 01:13 तक

    शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए, मध्याह्न में।

  2. संकष्टी चतुर्थी

    कृष्ण चतुर्थी: 29 अक्तू॰, 01:07 से 29 अक्तू॰, 22:10 तक · चंद्रोदय 20:11

    कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए। व्रत चंद्रोदय पर खुलता है।

नवंबर 2026

  1. विनायक चतुर्थी

    शुक्ल चतुर्थी: 12 नव॰, 18:09 से 13 नव॰, 20:43 तक

    शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए, मध्याह्न में।

  2. संकष्टी चतुर्थी

    कृष्ण चतुर्थी: 27 नव॰, 09:49 से 28 नव॰, 06:40 तक · चंद्रोदय 20:12

    कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए। व्रत चंद्रोदय पर खुलता है।

दिसंबर 2026

  1. विनायक चतुर्थी

    शुक्ल चतुर्थी: 12 दिस॰, 14:06 से 13 दिस॰, 16:48 तक

    शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए, मध्याह्न में।

  2. संकष्टी चतुर्थी

    कृष्ण चतुर्थी: 26 दिस॰, 20:05 से 27 दिस॰, 17:13 तक · चंद्रोदय 20:14

    कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, गणेश जी के लिए। व्रत चंद्रोदय पर खुलता है।

New Delhi, India के लिए तारीख़ और समय।

दूसरे शहर में, और दूसरे देश में तो अक्सर, कोई त्योहार अलग दिन पड़ सकता है: तिथि हर जगह एक ही क्षण बदलती है, पर सूर्योदय नहीं।

ये तारीख़ें कैसे निकलती हैं: साल की हर तिथि सूर्य और चंद्रमा की स्थिति (स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिरी अयनांश) से निकाली जाती है, साथ में वह किस चांद्र मास की है; अधिक मास भी इसी तरह पता चलता है। हर त्योहार उस दिन रखा जाता है जिस दिन उसकी तिथि दिन के उस भाग में हो जो परंपरा बताती है — ज़्यादातर के लिए सूर्योदय, दीपावली और प्रदोष के लिए संध्या, जन्माष्टमी और शिवरात्रि के लिए मध्यरात्रि, राम नवमी और गणेश चतुर्थी के लिए मध्याह्न, दशहरा और भाई दूज के लिए अपराह्न, करवा चौथ और संकष्टी के लिए चंद्रोदय। महीनों के नाम उत्तर भारतीय (पूर्णिमांत) पंचांग के हैं; गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण के अमांत पंचांग में कृष्ण पक्ष पिछले महीने का गिना जाता है।

शुभ मुहूर्त की तारीख़ें पंचांग अपनी कुंडली बनाइए

यह क्या है

यह कैलेंडर किसी छपी सूची से नकल नहीं है। साल की हर तिथि सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से, उसके शुरू और ख़त्म होने के क्षण के साथ, निकाली जाती है, और हर त्योहार उस दिन रखा जाता है जिस दिन परंपरा उसे मनाती है: ज़्यादातर के लिए सूर्योदय की तिथि, दीपावली, धनतेरस और प्रदोष के लिए संध्या की, जन्माष्टमी और शिवरात्रि के लिए मध्यरात्रि की, करवा चौथ और संकष्टी के लिए चंद्रोदय की।

सूर्योदय और चंद्रोदय जगह के साथ बदलते हैं, इसलिए तारीख़ें आपके अपने शहर के लिए निकाली जाती हैं। ऊपर अपना शहर चुनें; डिफ़ॉल्ट नई दिल्ली है। एकादशी स्मार्त नियम से है, जो ज़्यादातर पंचांग मानते हैं; जहाँ वैष्णव परंपरा अलग हो सकती है, वहाँ लिखा है।

सामान्य प्रश्न

  • मेरे घर के पंचांग में त्योहार अलग दिन क्यों है? उत्तर देखिए

    अक्सर जगह या नियम के कारण। तिथि हर जगह एक ही क्षण बदलती है, पर सूर्योदय नहीं, इसलिए बहुत पूर्व या पश्चिम का शहर एक दिन का अंतर रख सकता है। कुछ परिवार अलग नियम मानते हैं — वैष्णव एकादशी, या रक्षा बंधन में भद्रा। हर प्रविष्टि के साथ दिए तिथि के समय से साफ़ दिखता है कि दिन की सीमा कहाँ पड़ती है।

  • अधिक मास क्या है? उत्तर देखिए

    ऐसा चांद्र मास जिसमें सूर्य किसी नई राशि में प्रवेश नहीं करते। यह लगभग हर तीन साल में आता है और चांद्र कैलेंडर को ऋतुओं के साथ रखता है। इसमें त्योहार नहीं मनाए जाते; अधिक मास की एकादशियों के अपने नाम हैं, पद्मिनी और परमा।

  • एकादशी उसी दिन है जिस दिन शुरू होती है या अगले दिन? उत्तर देखिए

    उस दिन जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो। अगर दो सूर्योदयों पर हो, तो ज़्यादातर पंचांग पहला दिन मानते हैं; वैष्णव (इस्कॉन) परंपरा दूसरा मान सकती है।

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