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एकादशी 2028: सभी तिथियाँ

साल भर के सारे त्योहार, एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या, प्रदोष और संक्रांति — आपके शहर के हिसाब से, और हर तिथि के शुरू व ख़त्म होने के सटीक समय के साथ।

त्योहार और व्रत कैलेंडर — एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या और नवरात्रि के चित्रों वाला टेबल कैलेंडर

जनवरी 2028

  1. पौष पुत्रदा एकादशी

    शुक्ल एकादशी: 7 जन॰, 20:30 से 8 जन॰, 19:36 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

  2. षटतिला एकादशी

    कृष्ण एकादशी: 21 जन॰, 12:17 से 22 जन॰, 13:04 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

फ़रवरी 2028

  1. जया एकादशी

    शुक्ल एकादशी: 6 फ़र॰, 11:18 से 7 फ़र॰, 09:25 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

  2. विजया एकादशी

    कृष्ण एकादशी: 20 फ़र॰, 03:48 से 21 फ़र॰, 05:46 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

मार्च 2028

  1. आमलकी एकादशी

    शुक्ल एकादशी: 6 मार्च, 23:01 से 7 मार्च, 20:30 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

  2. पापमोचनी एकादशी

    कृष्ण एकादशी: 20 मार्च, 21:36 से 22 मार्च, 00:14 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

अप्रैल 2028

  1. कामदा एकादशी

    शुक्ल एकादशी: 5 अप्रैल, 07:46 से 6 अप्रैल, 04:58 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

  2. वरूथिनी एकादशी

    कृष्ण एकादशी: 19 अप्रैल, 16:14 से 20 अप्रैल, 18:47 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

मई 2028

  1. मोहिनी एकादशी

    शुक्ल एकादशी: 4 मई, 14:13 से 5 मई, 11:33 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

  2. अपरा एकादशी

    कृष्ण एकादशी: 19 मई, 10:11 से 20 मई, 12:01 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

जून 2028

  1. निर्जला एकादशी

    शुक्ल एकादशी: 2 जून, 19:32 से 3 जून, 17:26 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

  2. योगिनी एकादशी

    कृष्ण एकादशी: 18 जून, 02:27 से 19 जून, 03:15 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

जुलाई 2028

  1. देवशयनी एकादशी

    शुक्ल एकादशी: 2 जुल॰, 01:14 से 3 जुल॰, 00:04 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

  2. कामिका एकादशी

    कृष्ण एकादशी: 17 जुल॰, 16:46 से 18 जुल॰, 16:26 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

अगस्त 2028

  1. श्रावण पुत्रदा एकादशी

    शुक्ल एकादशी: 31 जुल॰, 08:49 से 1 अग॰, 08:51 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

  2. अजा एकादशी

    कृष्ण एकादशी: 16 अग॰, 05:12 से 17 अग॰, 03:49 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

  3. परिवर्तिनी एकादशी

    शुक्ल एकादशी: 29 अग॰, 19:31 से 30 अग॰, 20:47 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

सितंबर 2028

  1. इंदिरा एकादशी

    कृष्ण एकादशी: 14 सित॰, 15:55 से 15 सित॰, 13:42 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

  2. पापांकुशा एकादशी

    शुक्ल एकादशी: 28 सित॰, 09:55 से 29 सित॰, 12:07 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

अक्तूबर 2028

  1. रमा एकादशी

    कृष्ण एकादशी: 14 अक्तू॰, 01:13 से 14 अक्तू॰, 22:28 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

  2. देवउठनी एकादशी

    शुक्ल एकादशी: 28 अक्तू॰, 03:47 से 29 अक्तू॰, 06:21 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

नवंबर 2028

  1. उत्पन्ना एकादशी

    कृष्ण एकादशी: 12 नव॰, 09:31 से 13 नव॰, 06:42 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

  2. मोक्षदा एकादशी

    शुक्ल एकादशी: 26 नव॰, 23:59 से 28 नव॰, 02:18 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

दिसंबर 2028

  1. सफला एकादशी

    कृष्ण एकादशी: 11 दिस॰, 17:33 से 12 दिस॰, 15:13 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

  2. पौष पुत्रदा एकादशी

    शुक्ल एकादशी: 26 दिस॰, 20:56 से 27 दिस॰, 22:27 तक

    हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत के रूप में। ज़्यादातर पंचांग इसे उस दिन रखते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।

New Delhi, India के लिए तारीख़ और समय।

दूसरे शहर में, और दूसरे देश में तो अक्सर, कोई त्योहार अलग दिन पड़ सकता है: तिथि हर जगह एक ही क्षण बदलती है, पर सूर्योदय नहीं।

ये तारीख़ें कैसे निकलती हैं: साल की हर तिथि सूर्य और चंद्रमा की स्थिति (स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिरी अयनांश) से निकाली जाती है, साथ में वह किस चांद्र मास की है; अधिक मास भी इसी तरह पता चलता है। हर त्योहार उस दिन रखा जाता है जिस दिन उसकी तिथि दिन के उस भाग में हो जो परंपरा बताती है — ज़्यादातर के लिए सूर्योदय, दीपावली और प्रदोष के लिए संध्या, जन्माष्टमी और शिवरात्रि के लिए मध्यरात्रि, राम नवमी और गणेश चतुर्थी के लिए मध्याह्न, दशहरा और भाई दूज के लिए अपराह्न, करवा चौथ और संकष्टी के लिए चंद्रोदय। महीनों के नाम उत्तर भारतीय (पूर्णिमांत) पंचांग के हैं; गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण के अमांत पंचांग में कृष्ण पक्ष पिछले महीने का गिना जाता है।

शुभ मुहूर्त की तारीख़ें पंचांग अपनी कुंडली बनाइए

यह क्या है

यह कैलेंडर किसी छपी सूची से नकल नहीं है। साल की हर तिथि सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से, उसके शुरू और ख़त्म होने के क्षण के साथ, निकाली जाती है, और हर त्योहार उस दिन रखा जाता है जिस दिन परंपरा उसे मनाती है: ज़्यादातर के लिए सूर्योदय की तिथि, दीपावली, धनतेरस और प्रदोष के लिए संध्या की, जन्माष्टमी और शिवरात्रि के लिए मध्यरात्रि की, करवा चौथ और संकष्टी के लिए चंद्रोदय की।

सूर्योदय और चंद्रोदय जगह के साथ बदलते हैं, इसलिए तारीख़ें आपके अपने शहर के लिए निकाली जाती हैं। ऊपर अपना शहर चुनें; डिफ़ॉल्ट नई दिल्ली है। एकादशी स्मार्त नियम से है, जो ज़्यादातर पंचांग मानते हैं; जहाँ वैष्णव परंपरा अलग हो सकती है, वहाँ लिखा है।

सामान्य प्रश्न

  • मेरे घर के पंचांग में त्योहार अलग दिन क्यों है? उत्तर देखिए

    अक्सर जगह या नियम के कारण। तिथि हर जगह एक ही क्षण बदलती है, पर सूर्योदय नहीं, इसलिए बहुत पूर्व या पश्चिम का शहर एक दिन का अंतर रख सकता है। कुछ परिवार अलग नियम मानते हैं — वैष्णव एकादशी, या रक्षा बंधन में भद्रा। हर प्रविष्टि के साथ दिए तिथि के समय से साफ़ दिखता है कि दिन की सीमा कहाँ पड़ती है।

  • अधिक मास क्या है? उत्तर देखिए

    ऐसा चांद्र मास जिसमें सूर्य किसी नई राशि में प्रवेश नहीं करते। यह लगभग हर तीन साल में आता है और चांद्र कैलेंडर को ऋतुओं के साथ रखता है। इसमें त्योहार नहीं मनाए जाते; अधिक मास की एकादशियों के अपने नाम हैं, पद्मिनी और परमा।

  • एकादशी उसी दिन है जिस दिन शुरू होती है या अगले दिन? उत्तर देखिए

    उस दिन जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो। अगर दो सूर्योदयों पर हो, तो ज़्यादातर पंचांग पहला दिन मानते हैं; वैष्णव (इस्कॉन) परंपरा दूसरा मान सकती है।

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