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हिंदू त्योहार 2026

साल भर के सारे त्योहार, एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या, प्रदोष और संक्रांति — आपके शहर के हिसाब से, और हर तिथि के शुरू व ख़त्म होने के सटीक समय के साथ।

त्योहार और व्रत कैलेंडर — एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या और नवरात्रि के चित्रों वाला टेबल कैलेंडर

जनवरी 2026

  1. लोहड़ी

    मकर संक्रांति से पहले की रात, पंजाब और उत्तर भारत में अलाव के साथ।

  2. मकर संक्रांति

    सूर्य का मकर में प्रवेश 14 जन॰, 15:07

    सूर्य का मकर राशि में प्रवेश। तमिलनाडु में पोंगल, गुजरात में उत्तरायण, उत्तर भारत में खिचड़ी।

  3. वसंत पंचमी

    शुक्ल पंचमी: 23 जन॰, 02:28 से 24 जन॰, 01:46 तक

    माघ शुक्ल पंचमी, वसंत का आगमन; सरस्वती की आराधना।

मार्च 2026

  1. होलिका दहन

    पूर्णिमा: 2 मार्च, 17:56 से 3 मार्च, 17:07 तक · भद्रा समाप्त 3 मार्च, 05:28

    फाल्गुन पूर्णिमा की संध्या का दहन, सूर्यास्त के बाद और भद्रा के बाहर।

  2. होली

    रंगों का त्योहार, होलिका दहन के अगले दिन।

  3. गुड़ी पड़वा / उगादि

    शुक्ल प्रतिपदा: 19 मार्च, 06:53 से 20 मार्च, 04:52 तक

    चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, हिंदू नववर्ष: महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, दक्षिण में उगादि।

  4. चैत्र नवरात्रि आरंभ

    शुक्ल प्रतिपदा: 19 मार्च, 06:53 से 20 मार्च, 04:52 तक

    वसंत में देवी की नौ रातें, घटस्थापना से आरंभ।

  5. राम नवमी

    शुक्ल नवमी: 26 मार्च, 11:49 से 27 मार्च, 10:07 तक

    श्रीराम का जन्मोत्सव, चैत्र शुक्ल नवमी, मध्याह्न में।

  6. महावीर जयंती

    शुक्ल त्रयोदशी: 30 मार्च, 07:10 से 31 मार्च, 06:56 तक

    भगवान महावीर का जन्मोत्सव, चैत्र शुक्ल त्रयोदशी।

अप्रैल 2026

  1. हनुमान जयंती

    पूर्णिमा: 1 अप्रैल, 07:06 से 2 अप्रैल, 07:42 तक

    चैत्र पूर्णिमा, उत्तर भारत में हनुमान जी का जन्मोत्सव।

  2. बैसाखी

    सूर्य का मेष में प्रवेश 14 अप्रैल, 09:32

    सूर्य का मेष में प्रवेश; पंजाब का फ़सल उत्सव और कई क्षेत्रों का सौर नववर्ष।

  3. अक्षय तृतीया

    शुक्ल तृतीया: 19 अप्रैल, 10:49 से 20 अप्रैल, 07:28 तक

    वैशाख शुक्ल तृतीया। परंपरा में इस दिन नया काम अलग मुहूर्त देखे बिना शुरू किया जाता है।

मई 2026

  1. बुद्ध पूर्णिमा

    पूर्णिमा: 30 अप्रैल, 21:13 से 1 मई, 22:53 तक

    वैशाख पूर्णिमा: बुद्ध का जन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाण।

  2. वट सावित्री व्रत

    अमावस्या: 16 मई, 05:11 से 17 मई, 01:31 तक

    ज्येष्ठ अमावस्या। सुहागिन स्त्रियाँ व्रत रखकर वट वृक्ष की आराधना करती हैं।

जुलाई 2026

  1. जगन्नाथ रथ यात्रा

    शुक्ल द्वितीया: 15 जुल॰, 11:51 से 16 जुल॰, 08:53 तक

    आषाढ़ शुक्ल द्वितीया, पुरी की रथ यात्रा।

  2. गुरु पूर्णिमा

    पूर्णिमा: 28 जुल॰, 18:19 से 29 जुल॰, 20:05 तक

    आषाढ़ पूर्णिमा, गुरुओं के सम्मान का दिन; व्यास पूर्णिमा भी।

अगस्त 2026

  1. सावन सोमवार · 1वाँ सोमवार

    श्रावण (उत्तर भारतीय गणना) के सोमवार, शिव के लिए।

  2. सावन सोमवार · 2वाँ सोमवार

    श्रावण (उत्तर भारतीय गणना) के सोमवार, शिव के लिए।

  3. हरियाली तीज

    शुक्ल तृतीया: 14 अग॰, 18:47 से 15 अग॰, 17:29 तक

    श्रावण शुक्ल तृतीया, उत्तर भारत की सावन की तीज।

  4. नाग पंचमी

    शुक्ल पंचमी: 16 अग॰, 16:53 से 17 अग॰, 17:00 तक

    श्रावण शुक्ल पंचमी; नाग देवता का सम्मान।

  5. सावन सोमवार · 3वाँ सोमवार

    श्रावण (उत्तर भारतीय गणना) के सोमवार, शिव के लिए।

  6. सावन सोमवार · 4वाँ सोमवार

    श्रावण (उत्तर भारतीय गणना) के सोमवार, शिव के लिए।

  7. रक्षा बंधन

    पूर्णिमा: 27 अग॰, 09:09 से 28 अग॰, 09:48 तक · भद्रा समाप्त 27 अग॰, 21:32

    श्रावण पूर्णिमा। राखी पूर्णिमा के अपराह्न में, भद्रा के बाहर बाँधी जाती है।

सितंबर 2026

  1. कृष्ण जन्माष्टमी

    कृष्ण अष्टमी: 4 सित॰, 02:25 से 5 सित॰, 00:14 तक

    श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव, भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, मध्यरात्रि में।

  2. हरतालिका तीज

    शुक्ल तृतीया: 13 सित॰, 07:08 से 14 सित॰, 07:07 तक

    भाद्रपद शुक्ल तृतीया, शिव-पार्वती के लिए स्त्रियों का व्रत।

  3. गणेश चतुर्थी

    शुक्ल चतुर्थी: 14 सित॰, 07:07 से 15 सित॰, 07:44 तक

    भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी, गणेश जन्मोत्सव, मध्याह्न में। दस दिन अनंत चतुर्दशी पर पूरे होते हैं।

  4. अनंत चतुर्दशी

    शुक्ल चतुर्दशी: 24 सित॰, 23:18 से 25 सित॰, 23:07 तक

    भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी, गणेश विसर्जन का दिन।

अक्तूबर 2026

  1. सर्व पितृ अमावस्या

    अमावस्या: 9 अक्तू॰, 21:36 से 10 अक्तू॰, 21:20 तक

    पितृ पक्ष का अंतिम दिन, सभी पितरों के श्राद्ध के लिए।

  2. शारदीय नवरात्रि आरंभ

    शुक्ल प्रतिपदा: 10 अक्तू॰, 21:20 से 11 अक्तू॰, 21:31 तक

    शरद ऋतु में देवी की नौ रातें, घटस्थापना से आरंभ।

  3. दुर्गा अष्टमी

    शुक्ल अष्टमी: 18 अक्तू॰, 08:28 से 19 अक्तू॰, 10:52 तक

    शारदीय नवरात्रि का आठवाँ दिन।

  4. महानवमी

    शुक्ल नवमी: 19 अक्तू॰, 10:52 से 20 अक्तू॰, 12:50 तक

    शारदीय नवरात्रि का नौवाँ दिन।

  5. दशहरा (विजयादशमी)

    शुक्ल दशमी: 20 अक्तू॰, 12:50 से 21 अक्तू॰, 14:12 तक

    आश्विन शुक्ल दशमी, रावण पर राम की विजय, अपराह्न में।

  6. शरद पूर्णिमा

    पूर्णिमा: 25 अक्तू॰, 11:56 से 26 अक्तू॰, 09:41 तक

    आश्विन पूर्णिमा, साल की सबसे उजली पूर्णिमा; खीर चाँदनी में रखी जाती है।

  7. करवा चौथ

    कृष्ण चतुर्थी: 29 अक्तू॰, 01:07 से 29 अक्तू॰, 22:10 तक · चंद्रोदय 20:11

    कार्तिक कृष्ण चतुर्थी। सुहागिन स्त्रियाँ सूर्योदय से चंद्रोदय तक व्रत रखती हैं।

नवंबर 2026

  1. अहोई अष्टमी

    कृष्ण अष्टमी: 1 नव॰, 14:52 से 2 नव॰, 13:11 तक

    कार्तिक कृष्ण अष्टमी। माताएँ संध्या में तारे दिखने तक व्रत रखती हैं।

  2. धनतेरस आज

    कृष्ण त्रयोदशी: 6 नव॰, 10:31 से 7 नव॰, 10:48 तक

    कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी, दीपावली का पहला दिन, संध्या में।

  3. नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)

    कृष्ण चतुर्दशी: 7 नव॰, 10:48 से 8 नव॰, 11:28 तक

    कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी, दीपावली से एक दिन पहले; संध्या में यम दीप जलाया जाता है।

  4. दीपावली

    अमावस्या: 8 नव॰, 11:28 से 9 नव॰, 12:32 तक

    कार्तिक अमावस्या। लक्ष्मी पूजन संध्या के प्रदोष काल में, जब अमावस्या हो।

  5. गोवर्धन पूजा (अन्नकूट)

    शुक्ल प्रतिपदा: 9 नव॰, 12:32 से 10 नव॰, 14:00 तक

    कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा, दीपावली के अगले दिन।

  6. भाई दूज

    शुक्ल द्वितीया: 10 नव॰, 14:00 से 11 नव॰, 15:53 तक

    कार्तिक शुक्ल द्वितीया; बहनें भाइयों का तिलक करती हैं, अपराह्न में।

  7. छठ (संध्या अर्घ्य)

    शुक्ल षष्ठी: 14 नव॰, 23:24 से 16 नव॰, 02:01 तक

    कार्तिक शुक्ल षष्ठी: डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य। उगते सूर्य का अर्घ्य अगले दिन।

  8. तुलसी विवाह

    शुक्ल द्वादशी: 21 नव॰, 06:31 से 22 नव॰, 04:56 तक

    कार्तिक शुक्ल द्वादशी, तुलसी और शालिग्राम का विवाह, देवउठनी एकादशी के अगले दिन।

  9. कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली)

    पूर्णिमा: 23 नव॰, 23:42 से 24 नव॰, 20:23 तक

    कार्तिक पूर्णिमा: वाराणसी की देव दीपावली, और गुरु नानक जयंती।

दिसंबर 2026

  1. विवाह पंचमी

    शुक्ल पंचमी: 13 दिस॰, 16:48 से 14 दिस॰, 19:16 तक

    मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी, राम-सीता विवाह।

  2. गीता जयंती

    शुक्ल एकादशी: 19 दिस॰, 22:09 से 20 दिस॰, 20:15 तक

    मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी (मोक्षदा), जिस दिन भगवद्गीता कही गई।

New Delhi, India के लिए तारीख़ और समय।

दूसरे शहर में, और दूसरे देश में तो अक्सर, कोई त्योहार अलग दिन पड़ सकता है: तिथि हर जगह एक ही क्षण बदलती है, पर सूर्योदय नहीं।

ये तारीख़ें कैसे निकलती हैं: साल की हर तिथि सूर्य और चंद्रमा की स्थिति (स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिरी अयनांश) से निकाली जाती है, साथ में वह किस चांद्र मास की है; अधिक मास भी इसी तरह पता चलता है। हर त्योहार उस दिन रखा जाता है जिस दिन उसकी तिथि दिन के उस भाग में हो जो परंपरा बताती है — ज़्यादातर के लिए सूर्योदय, दीपावली और प्रदोष के लिए संध्या, जन्माष्टमी और शिवरात्रि के लिए मध्यरात्रि, राम नवमी और गणेश चतुर्थी के लिए मध्याह्न, दशहरा और भाई दूज के लिए अपराह्न, करवा चौथ और संकष्टी के लिए चंद्रोदय। महीनों के नाम उत्तर भारतीय (पूर्णिमांत) पंचांग के हैं; गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण के अमांत पंचांग में कृष्ण पक्ष पिछले महीने का गिना जाता है।

शुभ मुहूर्त की तारीख़ें पंचांग अपनी कुंडली बनाइए

यह क्या है

यह कैलेंडर किसी छपी सूची से नकल नहीं है। साल की हर तिथि सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से, उसके शुरू और ख़त्म होने के क्षण के साथ, निकाली जाती है, और हर त्योहार उस दिन रखा जाता है जिस दिन परंपरा उसे मनाती है: ज़्यादातर के लिए सूर्योदय की तिथि, दीपावली, धनतेरस और प्रदोष के लिए संध्या की, जन्माष्टमी और शिवरात्रि के लिए मध्यरात्रि की, करवा चौथ और संकष्टी के लिए चंद्रोदय की।

सूर्योदय और चंद्रोदय जगह के साथ बदलते हैं, इसलिए तारीख़ें आपके अपने शहर के लिए निकाली जाती हैं। ऊपर अपना शहर चुनें; डिफ़ॉल्ट नई दिल्ली है। एकादशी स्मार्त नियम से है, जो ज़्यादातर पंचांग मानते हैं; जहाँ वैष्णव परंपरा अलग हो सकती है, वहाँ लिखा है।

सामान्य प्रश्न

  • मेरे घर के पंचांग में त्योहार अलग दिन क्यों है? उत्तर देखिए

    अक्सर जगह या नियम के कारण। तिथि हर जगह एक ही क्षण बदलती है, पर सूर्योदय नहीं, इसलिए बहुत पूर्व या पश्चिम का शहर एक दिन का अंतर रख सकता है। कुछ परिवार अलग नियम मानते हैं — वैष्णव एकादशी, या रक्षा बंधन में भद्रा। हर प्रविष्टि के साथ दिए तिथि के समय से साफ़ दिखता है कि दिन की सीमा कहाँ पड़ती है।

  • अधिक मास क्या है? उत्तर देखिए

    ऐसा चांद्र मास जिसमें सूर्य किसी नई राशि में प्रवेश नहीं करते। यह लगभग हर तीन साल में आता है और चांद्र कैलेंडर को ऋतुओं के साथ रखता है। इसमें त्योहार नहीं मनाए जाते; अधिक मास की एकादशियों के अपने नाम हैं, पद्मिनी और परमा।

  • एकादशी उसी दिन है जिस दिन शुरू होती है या अगले दिन? उत्तर देखिए

    उस दिन जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो। अगर दो सूर्योदयों पर हो, तो ज़्यादातर पंचांग पहला दिन मानते हैं; वैष्णव (इस्कॉन) परंपरा दूसरा मान सकती है।

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