श्रीमद्भगवद्गीता
हर श्लोक हिंदी और अंग्रेज़ी अर्थ के साथ, अध्याय दर अध्याय
jeevandrishti.com/hi/books/bhagavad-gita से प्रिंट किया गया, जहाँ हर छंद का हिंदी और अंग्रेज़ी अर्थ है।
कर्म · ज्ञान · भक्ति
श्रीमद्भगवद्गीता के बारे में
श्रीमद्भगवद्गीता महाभारत युद्ध शुरू होने से ठीक पहले, कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में श्रीकृष्ण और अर्जुन का संवाद है। यह महाभारत के भीष्म पर्व का भाग है और परंपरा में इसे वेदव्यास की रचना माना जाता है। इसमें 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं, संस्कृत में।
विरोधी सेना में अपने गुरुओं और सगे-संबंधियों को देखकर अर्जुन का मन टूट जाता है और वे युद्ध से मना कर देते हैं। उनके सारथी श्रीकृष्ण उनकी शंकाओं का उत्तर देते हैं: कर्तव्य के बारे में, अविनाशी आत्मा के बारे में, फल की लालसा के बिना कर्म के बारे में, मन के बारे में और भक्ति के बारे में। दूर से युद्ध देखने की दिव्य दृष्टि पाए संजय यह पूरा संवाद नेत्रहीन राजा धृतराष्ट्र को सुनाते हैं।
यहाँ पूरी गीता है, सभी 18 अध्याय और 700 श्लोक, हर अध्याय अपने अलग पृष्ठ पर: हर श्लोक संस्कृत और रोमन अक्षरों में, इस साइट के लिए लिखे सरल हिंदी और अंग्रेज़ी अर्थ के साथ। यदि आप पहली बार पढ़ रहे हैं, तो दूसरे अध्याय में उपदेश का सार है।
अध्यायों की सूची
- अध्याय 1: अर्जुनविषादयोग अर्जुन का विषाद · 47 श्लोक पढ़ें
- अध्याय 2: सांख्ययोग ज्ञान का मार्ग · 72 श्लोक पढ़ें
- अध्याय 3: कर्मयोग कर्म का मार्ग · 43 श्लोक पढ़ें
- अध्याय 4: ज्ञानकर्मसंन्यासयोग ज्ञान और कर्म-संन्यास · 42 श्लोक पढ़ें
- अध्याय 5: कर्मसंन्यासयोग कर्म-संन्यास · 29 श्लोक पढ़ें
- अध्याय 6: आत्मसंयमयोग ध्यान और आत्मसंयम · 47 श्लोक पढ़ें
- अध्याय 7: ज्ञानविज्ञानयोग ज्ञान और विज्ञान · 30 श्लोक पढ़ें
- अध्याय 8: अक्षरब्रह्मयोग अविनाशी ब्रह्म · 28 श्लोक पढ़ें
- अध्याय 9: राजविद्याराजगुह्ययोग राजविद्या और राजगुह्य · 34 श्लोक पढ़ें
- अध्याय 10: विभूतियोग भगवान की विभूतियाँ · 42 श्लोक पढ़ें
- अध्याय 11: विश्वरूपदर्शनयोग विश्वरूप का दर्शन · 55 श्लोक पढ़ें
- अध्याय 12: भक्तियोग भक्ति का मार्ग · 20 श्लोक पढ़ें
- अध्याय 13: क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ · 34 श्लोक पढ़ें
- अध्याय 14: गुणत्रयविभागयोग तीन गुण · 27 श्लोक पढ़ें
- अध्याय 15: पुरुषोत्तमयोग पुरुषोत्तम · 20 श्लोक पढ़ें
- अध्याय 16: दैवासुरसम्पद्विभागयोग दैवी और आसुरी स्वभाव · 24 श्लोक पढ़ें
- अध्याय 17: श्रद्धात्रयविभागयोग तीन प्रकार की श्रद्धा · 28 श्लोक पढ़ें
- अध्याय 18: मोक्षसंन्यासयोग मोक्ष और संन्यास · 78 श्लोक पढ़ें
यहाँ दिए अर्थ सरल शब्दों में हैं और हर श्लोक के प्रचलित अर्थ पर आधारित हैं; ये न शब्दशः अनुवाद हैं, न भाष्य। रोमन अक्षर आसानी से पढ़ने के लिए सरल रखे गए हैं। यह पृष्ठ पाठ और मनन के लिए है; यह चिकित्सा या किसी अन्य पेशेवर सहायता का विकल्प नहीं है।
लोग अक्सर पूछते हैं
भगवद्गीता किसने कही?
श्रीकृष्ण ने, अर्जुन से, कुरुक्षेत्र में। संजय यह संवाद राजा धृतराष्ट्र को सुनाते हैं। गीता महाभारत का भाग है, जिसे परंपरा में वेदव्यास की रचना माना जाता है।
इसमें कितने अध्याय और श्लोक हैं?
प्रचलित संस्करण में 18 अध्याय और 700 श्लोक।
पढ़ना कहाँ से शुरू करें?
आरंभ से, या दूसरे अध्याय से, जिसमें मुख्य उपदेश है। बहुत से पाठक इसके बाद तीसरा अध्याय (कर्मयोग) और बारहवाँ अध्याय (भक्तियोग) पढ़ते हैं।
गीता जयंती कब होती है?
मोक्षदा एकादशी को, यानी मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी (नवंबर या दिसंबर), जिस दिन परंपरा के अनुसार गीता कही गई थी।
क्या इसे रोमन (अंग्रेज़ी) अक्षरों में पढ़ सकते हैं?
हाँ। किसी अध्याय के पृष्ठ पर “अंग्रेज़ी अक्षर” चालू करें, तो हर श्लोक संस्कृत के नीचे रोमन लिपि में दिखेगा।

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