चौघड़िया और राहु काल — 30 जनवरी 2027
आपके शहर के लिए आज का चौघड़िया, राहु काल और अभिजीत मुहूर्त, और साल के वे दिन जो विवाह, गृह प्रवेश, वाहन या संपत्ति के शास्त्रीय नियमों पर खरे उतरते हैं।

New Delhi, India
दिन के काल
राहु काल, यमगंड और गुलिक दिन के वे भाग हैं जिन्हें परंपरा नया काम शुरू करने में छोड़ देती है।
चौघड़िया
| 07:10–08:31 | काल | आम तौर पर टाला जाता है |
| 08:31–09:52 | शुभ | अनुकूल |
| 09:52–11:13 | रोग | आम तौर पर टाला जाता है |
| 11:13–12:34 | उद्वेग | आम तौर पर टाला जाता है |
| 12:34–13:55 | चर | सामान्य |
| 13:55–15:16 | लाभ | अनुकूल |
| 15:16–16:37 | अमृत | अनुकूल |
| 16:37–17:59 | काल | आम तौर पर टाला जाता है |
| 17:59–19:37 | लाभ | अनुकूल |
| 19:37–21:16 | उद्वेग | आम तौर पर टाला जाता है |
| 21:16–22:55 | शुभ | अनुकूल |
| 22:55–00:34 | अमृत | अनुकूल |
| 00:34–02:13 | चर | सामान्य |
| 02:13–03:52 | रोग | आम तौर पर टाला जाता है |
| 03:52–05:31 | काल | आम तौर पर टाला जाता है |
| 05:31–07:10 | लाभ | अनुकूल |
दिन और रात दोनों आठ-आठ भागों में बँटे हैं। अमृत, शुभ और लाभ अनुकूल माने जाते हैं, चर सामान्य; रोग, काल और उद्वेग नई शुरुआत के लिए आम तौर पर टाले जाते हैं।
2026 में मुहूर्त की तारीख़ें
2026 में 24 दिन · New Delhi, India
फ़रवरी 2026
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| 19 फ़र॰ गुरु | 20:52 – 06:56 (20 फ़र॰) | उत्तरा भाद्रपदा | शुक्ल तृतीया |
| 20 फ़र॰ शुक्र | 06:56 – 14:38 | उत्तरा भाद्रपदा | शुक्ल तृतीया |
मार्च 2026
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| 4 मार्च बुध | 16:49 – 06:43 (5 मार्च) | उत्तरा फाल्गुनी | कृष्ण द्वितीया |
| 5 मार्च गुरु | 06:43 – 06:42 (6 मार्च) | उत्तरा फाल्गुनी | कृष्ण द्वितीया |
| 6 मार्च शुक्र | 06:42 – 09:30 | हस्त | कृष्ण तृतीया |
| 9 मार्च सोम | 23:27 – 06:37 (10 मार्च) | अनुराधा | कृष्ण सप्तमी |
अप्रैल 2026
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| 20 अप्रैल सोम | 05:51 – 07:28 04:15 (21 अप्रैल) – 05:50 (21 अप्रैल) |
रोहिणी | शुक्ल तृतीया |
| 27 अप्रैल सोम | 21:18 – 05:44 (28 अप्रैल) | उत्तरा फाल्गुनी | शुक्ल द्वादशी |
| 29 अप्रैल बुध | 05:43 – 19:52 | हस्त | शुक्ल त्रयोदशी |
मई 2026
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| 4 मई सोम | 05:39 – 09:58 | अनुराधा | कृष्ण तृतीया |
| 6 मई बुध | 07:51 – 15:53 | मूला | कृष्ण पंचमी |
| 8 मई शुक्र | 12:22 – 21:20 | उत्तराषाढ़ा | कृष्ण सप्तमी |
जून 2026
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| 19 जून शुक्र | 10:07 – 17:00 | मघा | शुक्ल पंचमी |
| 24 जून बुध | 13:59 – 05:26 (25 जून) | स्वाती | शुक्ल दशमी |
| 25 जून गुरु | 05:26 – 16:29 | स्वाती | शुक्ल एकादशी |
| 26 जून शुक्र | 19:16 – 05:26 (27 जून) | अनुराधा | शुक्ल द्वादशी |
जुलाई 2026
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| 1 जुल॰ बुध | 07:38 – 05:28 (2 जुल॰) | उत्तराषाढ़ा | कृष्ण द्वितीया |
| 2 जुल॰ गुरु | 05:28 – 09:27 | उत्तराषाढ़ा | कृष्ण द्वितीया |
| 6 जुल॰ सोम | 16:07 – 05:30 (7 जुल॰) | उत्तरा भाद्रपदा | कृष्ण सप्तमी |
नवंबर 2026
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| 25 नव॰ बुध | 16:50 – 06:53 (26 नव॰) | रोहिणी | कृष्ण द्वितीया |
| 26 नव॰ गुरु | 06:53 – 17:47 | मृगशिरा | कृष्ण द्वितीया |
| 30 नव॰ सोम | 09:42 – 00:12 (1 दिस॰) | मघा | कृष्ण सप्तमी |
दिसंबर 2026
| तारीख़ | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| 10 दिस॰ गुरु | 08:46 – 23:58 | मूला | शुक्ल द्वितीया |
| 11 दिस॰ शुक्र | 03:04 (12 दिस॰) – 07:05 (12 दिस॰) | उत्तराषाढ़ा | शुक्ल तृतीया |
छोड़ी गई अवधियाँ
- शुक्र अस्त (सूर्य से 10° के भीतर, वक्री में 8°) 26 नव॰ 2025 – 17 फ़र॰ 2026
- खरमास (सूर्य धनु या मीन में) 16 दिस॰ 2025 – 14 जन॰ 2026
- होलाष्टक 24 फ़र॰ 2026 – 3 मार्च 2026
- खरमास (सूर्य धनु या मीन में) 15 मार्च 2026 – 14 अप्रैल 2026
- अधिक मास 17 मई 2026 – 15 जून 2026
- गुरु अस्त (सूर्य से 11° के भीतर) 15 जुल॰ 2026 – 13 अग॰ 2026
- चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी) 24 जुल॰ 2026 – 21 नव॰ 2026
- पितृ पक्ष 25 सित॰ 2026 – 10 अक्तू॰ 2026
- शुक्र अस्त (सूर्य से 10° के भीतर, वक्री में 8°) 19 अक्तू॰ 2026 – 29 अक्तू॰ 2026
- खरमास (सूर्य धनु या मीन में) 16 दिस॰ 2026 – 14 जन॰ 2027
कौन-से नियम लिए गए
नक्षत्र रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद और रेवती; शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी से त्रयोदशी और कृष्ण पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी व सप्तमी; सोमवार, बुधवार, गुरुवार या शुक्रवार।
ये वे दिन हैं जिनके नक्षत्र, तिथि और वार ऊपर दिए शास्त्रीय नियमों पर खरे उतरते हैं, उन अवधियों के बाहर जिनमें यह काम परंपरा से नहीं किया जाता। ग्रंथों और क्षेत्रों में नियम अलग-अलग हैं। आपके अपने काम का मुहूर्त आपकी कुंडली — और विवाह में दोनों की कुंडली — और उस क्षण का लग्न भी देखता है; सटीक समय कोई ज्योतिषी चुन सकता है।
दूसरा स्थान
यह क्या है
मुहूर्त वह समय है जिसे कोई काम शुरू करने के लिए उपयुक्त माना जाता है। इस पेज के काल — चौघड़िया, राहु काल, यमगंड, गुलिक, अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त — दिन और रात के तय हिस्से हैं, जो आपके शहर के वास्तविक सूर्योदय और सूर्यास्त से नापे जाते हैं, इसलिए ये हर दिन और हर शहर में बदलते हैं।
विवाह, गृह प्रवेश, वाहन या संपत्ति की तारीख़ें साल के हर दिन पर नक्षत्र, तिथि और वार के शास्त्रीय नियम लगाती हैं, और खरमास, चातुर्मास, अधिक मास, पितृ पक्ष, होलाष्टक और गुरु या शुक्र के अस्त होने के हफ़्ते छोड़ देती हैं। ये नियम पर खरे दिन बताती हैं, किसी एक व्यक्ति के लिए चुना गया समय नहीं।
सामान्य प्रश्न
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राहु काल क्या है? उत्तर देखिए
दिन का आठवाँ भाग, हर वार को अलग, जिसे परंपरा नया काम शुरू करने में छोड़ देती है। यह आपके स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त से नापा जाता है, इसलिए हर शहर और हर दिन एक ही समय नहीं होता।
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चौघड़िया क्या है? उत्तर देखिए
दिन और रात दोनों लगभग डेढ़-डेढ़ घंटे के आठ भागों में बँटते हैं। हर भाग का नाम — अमृत, शुभ, लाभ, चर, रोग, काल या उद्वेग — वार से तय होता है। गुजरात और उत्तर भारत में यात्रा, व्यापार या ख़रीद का समय चुनने में इसका आम उपयोग है।
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क्या इस सूची की तारीख़ मेरी शादी का मुहूर्त है? उत्तर देखिए
यह ऐसा दिन है जो सामान्य नियमों पर खरा उतरता है। शादी का मुहूर्त दोनों की कुंडली भी देखता है — हर व्यक्ति के लिए चंद्रमा का बल और उस क्षण का लग्न — जो केवल आपकी कुंडली देखने वाला ज्योतिषी कर सकता है।